IUCN Status
: Not Applicable
- Shrubs
- Jaipur / Sawai Madhopur / Jodhpur
- Naturally grown
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डाइक्रोस्टेकिस सिनेरिया (Dichrostachys cinerea), जिसे सामान्यतः सिकल बुश (Sickle Bush), गोया खैर (राजस्थान), खेरी, शमी अथवा Ashy Babool कहा जाता है, फैबेसी (उपकुल: Mimosoideae; पूर्व में Mimosaceae) कुल की एक सुंदर, अत्यधिक शाखायुक्त एवं काँटेदार झाड़ी अथवा छोटा पर्णपाती वृक्ष है। यह सामान्यतः 3–8 मीटर ऊँचा होता है तथा भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका एवं उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। यह शुष्क वन क्षेत्रों, झाड़ियों, चारागाहों तथा बंजर भूमि में आसानी से विकसित होता है।
इसकी पत्तियाँ द्विपंखित (Bipinnately compound) होती हैं, जिनकी लंबाई 4–8 सेमी होती है। प्रत्येक पत्ती में 5–15 जोड़ी पर्णिकाएँ तथा प्रत्येक पर्णिका पर 12–30 जोड़ी छोटे-छोटे पत्रक होते हैं। इसकी सबसे विशिष्ट पहचान इसके आकर्षक बोतल-ब्रश (Bottle-brush) जैसे पुष्पक्रम हैं, जिनका ऊपरी भाग गुलाबी तथा निचला भाग पीले रंग का होता है। समय के साथ गुलाबी भाग सफेद पड़ जाता है। पुष्प कलियाँ गुलाबी एवं पीले रंग के शहतूत जैसे आकर्षक दिखाई देती हैं।
फल संकरी, चपटी, विभिन्न प्रकार से मुड़ी हुई अथवा कुंडलित (Curved or Coiled) फलियाँ होती हैं, जिनकी लंबाई 5–7 सेमी तथा चौड़ाई 0.8–1.5 सेमी होती है। पकने पर फलियाँ काले रंग की, चिकनी तथा अनेक कठोर बीजों वाली होती हैं। इसका पुष्पन सामान्यतः जून से अगस्त के बीच होता है।
यह एक नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen-fixing) करने वाली प्रजाति है, जो मृदा की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होती है। इसकी पत्तियाँ एवं कोमल शाखाएँ बकरियों, भेड़ों एवं अन्य पशुओं के लिए अच्छा चारा हैं, जबकि इसकी लकड़ी ईंधन एवं कोयला बनाने में उपयोगी होती है।
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