IUCN Status
- Trees
- Ranthambore National Park, Sawai-madhopur / Jaipur / Kota, bundi, baran, jhalawar, Chittorgarh, udaipur, Ajmer
- Cultivated
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Ailanthus excelsa जिसे सामान्यतः महारुख, महानिंब, Indian Tree of Heaven तथा राजस्थान में अरडू (अरडु/आर्डू) के नाम से जाना जाता है, सिमारूबेसी (Simaroubaceae) कुल का एक बड़ा, पर्णपाती वृक्ष है। यह सामान्यतः 18–25 मीटर ऊँचा होता है तथा इसका तना सीधा, 60–80 सेमी व्यास का होता है। इसकी छाल हल्के धूसर रंग की, चिकनी तथा परिपक्व होने पर धूसर-भूरी एवं खुरदरी हो जाती है। छाल सुगंधित तथा स्वाद में हल्की कड़वी होती है।
इसकी पत्तियाँ एकांतर (Alternate), बड़ी, संयुक्त (Pinnately compound) तथा 30–60 सेमी या उससे अधिक लंबी होती हैं। इनमें 8–14 या अधिक जोड़ी पत्रक होते हैं, जो अंडाकार से भालाकार, असमान आधार वाले, लंबे नुकीले तथा किनारों पर मोटे दाँतेदार या खंडित होते हैं। पुष्पक्रम पत्ती की बगल में निकले हुए, लटकते एवं अत्यधिक शाखायुक्त गुच्छों के रूप में होता है। पुष्प छोटे, हरित-पीले रंग के तथा अधिकांश वृक्षों में नर और मादा पुष्प अलग-अलग वृक्षों पर पाए जाते हैं। प्रत्येक पुष्प में 5 बाह्यदल तथा 5 संकीर्ण पंखुड़ियाँ होती हैं।
फल एकबीजी समारा (Samara) होता है, जो चपटा, भालाकार, लगभग 5 सेमी लंबा, ताँबे-लाल रंग का, स्पष्ट शिराओं वाला तथा आधार पर हल्का मुड़ा हुआ होता है। इसका पुष्पन सामान्यतः जनवरी से मार्च के बीच होता है।
राजस्थान के शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में अरडू एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण चारा वृक्ष माना जाता है। इसकी कोमल पत्तियाँ भेड़ एवं बकरियों का अत्यंत प्रिय चारा हैं और सूखे के समय पशुओं के लिए पौष्टिक हरित चारे का प्रमुख स्रोत बनती हैं। इसलिए इसे ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खेतों की मेड़ों तथा चारागाहों में लगाया जाता है।
इस वृक्ष की छाल, पत्तियाँ एवं ताजा रस पारंपरिक चिकित्सा में ज्वरनाशक, टॉनिक तथा प्रसवोत्तर स्वास्थ्य लाभ के लिए उपयोग किए जाते हैं। इसकी तीव्र वृद्धि, सूखा-सहिष्णुता तथा उत्कृष्ट चारा मूल्य के कारण यह सामाजिक वानिकी, कृषि वानिकी एवं शुष्क क्षेत्रों के हरितीकरण के लिए अत्यंत उपयुक्त वृक्ष माना जाता है।
PC: Ravi Saini & Sonu Kumar -
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