IUCN Status
: Not Applicable
- Trees
- Jaipur Rajasthan / Sawai Madhopur / Kota, bundi, baran, jhalawar, Chittorgarh, udaipur, Ajmer, Bhilwara
- Naturally grown
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इमली (Tamarindus indica) फैबेसी (Fabaceae) कुल का एक बड़ा, दीर्घायु एवं सदाबहार से अर्ध-सदाबहार वृक्ष है। इसका मूल उद्गम अफ्रीका माना जाता है, किंतु यह भारत सहित समस्त उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में व्यापक रूप से प्राकृतिक एवं संवर्धित अवस्था में पाया जाता है। वृक्ष सामान्यतः 15–25 मीटर ऊँचा होता है तथा इसका घना, गोलाकार छत्र प्रचुर छाया प्रदान करता है। तना मोटा, छाल धूसर-भूरी एवं खुरदरी होती है। पत्तियाँ संयुक्त, समपंखी (Paripinnate) होती हैं, जिनमें 10–20 जोड़ी छोटे, आयताकार पत्रक लगे रहते हैं।
पुष्प छोटे, पीले रंग के होते हैं जिन पर लाल या नारंगी धारियाँ होती हैं तथा ये छोटे गुच्छों (Racemes) में लगते हैं। फल भूरे रंग की, मोटी, लंबी एवं हल्की मुड़ी हुई फलियाँ होती हैं, जिनके भीतर चिपचिपा, भूरा, खट्टा-मीठा गूदा तथा कठोर, चमकीले भूरे बीज पाए जाते हैं। गूदा टार्टरिक अम्ल, शर्करा तथा अनेक खनिजों से भरपूर होता है।
इमली का उपयोग भोजन, पेय पदार्थ, चटनी, अचार एवं मसालों में व्यापक रूप से किया जाता है। आयुर्वेद में इसके फल, पत्तियाँ, छाल एवं बीजों का उपयोग पाचन सुधारने, कब्ज, ज्वर, सूजन तथा विभिन्न त्वचा रोगों के उपचार में किया जाता है। इसकी कठोर लकड़ी फर्नीचर, कृषि उपकरण एवं ईंधन के लिए उपयोगी होती है। यह वृक्ष सूखा-सहिष्णु, पर्यावरण के अनुकूल तथा उत्कृष्ट छायादार वृक्ष होने के कारण सड़क किनारे, उद्यानों एवं कृषि वानिकी में व्यापक रूप से लगाया जाता है।
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Tree habit
PC: Sonu Kumar
Beautiful frame 👌